राजधानी देहरादून में गैस की समस्या बढ़नी जा रही है जिसके चलते गैस एजेंसियों पर सवालिया निशान खड़े होने शुरू हो गए हैं। लोगों का आरोप है गैस एजेंसी संचालक कालाबाजारी करके सिलेंडरों को ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं। जबकि जनता को बुकिंग करने के बावजूद समय से सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।
इसके चला ऐसा प्रतीत होता है कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग एवं जिला अधिकारी कार्यालय की निगरानी निरंतर कमजोर पड़ती नजर आ रही है। पूरे शहर में आए दिन गैस सिलेंडर की कालाबाजारी सोशल मीडिया व पब्लिक डोमेन में सार्वजनिक हो रही है उसके बाद भी क्या जिला प्रशासन उन पूर्ति निरीक्षकों पर भी कार्रवाई करेगा जिनको उक्त एजेंसियों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
देहरादून की अनुराग एचपी गैस एजेंसी आफिस में प्लास्टिक के कट्टों में रखकर सिलेंडर ब्लैक किये जाने की घटनाएं निरंतर सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं, सूत्रों के हवाले से बताया गया कि इन एजेंसियों में अधिकतर सुबह या शाम के समय कालाबाजारी से जुड़े हुए सरगना प्लास्टिक के कट्टों में रखकर सिलेंडर ले जाते हैं, देहरादून शहर में ही मे आम जनता के लिए 45 दिन की बुकिंग का फरमान जारी है, शादी वाले घरों के लोग सिलेंडर के लिए एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं और यहां प्रशासन की नाक के नीचे जमकर कालाबाजारी हो रही है जब गैस एजेंसी से ही सीधे गैस सिलेंडर ब्लैक करने की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहें है तो अनुमान लगाना मुश्किल है कि ऐसी गैस एजेंसियो के डिलीवरी मैन डिलीवरी की गाड़ियों से कालाबाजारी से जुड़े सरगनाओ को कितनी गैस मुहिया करा रहे होंगे यह बहुत विचारणीय प्रश्न है, इसके अलावा जिला प्रशासन और खाद्य जिला खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा सभी गैस एजेंसियों को यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी उपभोक्ता को गैस एजेंसी आफिस या गोडाउन से कैश एंड कैरी में भी गैस सिलेंडर न दिया जाए, आनलाइन बुकिंग होने के बाद ही उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी पर ही गैस सिलेंडर दिया जाएगा, इसके बाद भी यह सब कालाबाजारी हो रही है, वहीं दूसरी तरफ शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को शादी जैसे बड़े आयोजनों में भी 2 सिलेंडर से अधिक नहीं दिया जा रहा है, आखिर क्यों ऐसे दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं।
पीयूष शर्मा

