उत्तराखंड की धरोहरों और जमीनों को पूंजीपतियों के हवाले कर रही है धामी सरकार: हरीश रावत
• ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान के तहत अलकनंदा होटल परिसर में कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में हुंकार
• सरकारी संपत्तियों और जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की नीतियों के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा
हरिद्वार: उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेशव्यापी आह्वान पर आज पवित्र नगरी हरिद्वार में ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ आंदोलन के तहत एक विशाल विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हरिद्वार स्थित ऐतिहासिक अलकनंदा होटल के समीप धामी सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और धरना दिया।

जनता के हकों पर डाका डाल रही है सरकार: हरीश रावत
धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि धामी सरकार तथाकथित नीतियों की आड़ में उत्तराखंड की बहुमूल्य जमीनों और ऐतिहासिक सरकारी संपत्तियों को अपने चहेते पूंजीपतियों और बाहरी भू-माफियाओं के हवाले कर रही है। अलकनंदा होटल जैसी महत्वपूर्ण राज्य धरोहरों और जमीनों के निजीकरण की कोशिशें उत्तराखंड के स्वाभिमान और स्थानीय जनता के हकों पर सीधा डाका है।
हरीश रावत ने चेतावनी देते हुए कहा, “उत्तराखंड राज्य का गठन जल, जंगल और जमीन पर यहां के मूल निवासियों के अधिकार को सुरक्षित करने के लिए हुआ था। लेकिन आज की सरकार उत्तराखंड की पहचान और संसाधनों की खुली नीलामी कर रही है। कांग्रेस राज्य के हितों की रक्षा के लिए चुप नहीं बैठेगी और इस आंदोलन को हर गांव, हर गली तक लेकर जाएगी।”
उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने की जंग
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण आज स्थानीय युवा बेरोजगार घूम रहे हैं और राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा होता जा रहा है। ‘भूमि बचाओ-धामी हटाओ’ अभियान केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की अस्मिता, संस्कृति और भूगोल को बचाने की एक निर्णायक जंग है।
कांग्रेस की मुख्य मांगें:
1. पर्यटन और सर्विस सेक्टर के नाम पर उत्तराखंड की सरकारी संपत्तियों और जमीनों को निजी हाथों में सौंपने की प्रक्रिया तुरंत रोकी जाए।
2. राज्य में कड़ा भू-कानून लागू कर स्थानीय निवासियों के जमीन संबंधी अधिकारों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए।
3. अलकनंदा होटल सहित सभी राजकीय संपत्तियों का संचालन जनहित और स्थानीय युवाओं के रोजगार को प्राथमिकता देकर किया जाए।
इस विरोध प्रदर्शन और धरने में हरिद्वार जिले के तमाम वरिष्ठ कांग्रेस नेता, अग्रिम संगठनों के पदाधिकारी, स्थानीय व्यापारी, तीर्थ पुरोहित और भारी संख्या में क्षेत्र की जनता उपस्थित रही।

