हेल्थकेयर के भविष्य पर महामंथन: UPES की वर्ल्ड कांग्रेस संपन्न, स्वास्थ्य विज्ञान और तकनीक का महासंगम
हेल्थकेयर में रिसर्च, एआई और स्पेस टेक्नोलॉजी की भूमिका पर जुटे 500 से अधिक विशेषज्ञ
यूपीईएस वर्ल्ड कांग्रेस ऑन हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी 2026 भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर और रिसर्च इकोसिस्टम बनाने की प्रतिबद्धता के साथ संपन्न हुई
देहरादून: 13 अक्टूबर 2026, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी यानी एसओएचएसटी, यूपीईएस ने वर्ल्ड कांग्रेस ऑन हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी यानी डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 का समापन किया। इस तीन.दिवसीय आयोजन में 500़ शोधकर्ता, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, अकादमिक्स, पॉलिसीमेकर्स, छात्र और इंडस्ट्री प्रतिनिधि वैज्ञानिक आदान.प्रदान, विशेषज्ञ संवाद और इनोवेशन के लिए एक साथ आए। कांग्रेस ने हेल्थकेयर, लाइफ साइंसेज़, टेक्नोलॉजी, पब्लिक हेल्थ और सहयोगी डिसिप्लिन्स से जुड़े विविध दृष्टिकोणों को एक मंच पर लाया।
स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी यानी एसओएचएसटी, यूपीईएस द्वारा आयोजित यह तीन.दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस डॉ.पद्मा वेंकट, डीनए एसओएचएसटी, यूपीईएस और डॉ. निधि चौहान, प्रोफेसर और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी, एसओएचएसटी, के नेतृत्व में आयोजित की गई। यह कांग्रेस ” ट्रांसफॉर्मिंग हेल्थ थ्रू रिसर्च एंड इनोवेशन” थीम के तहत आयोजित हुई।
उद्घाटन दिवस के बाद, दूसरे और तीसरे दिन हेल्थकेयर और रिसर्च इकोसिस्टम से जुड़े विविध प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें मंत्रालय आयुष, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर, इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी इसरो, सीएसआईआर, नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल यानी नैक नेशनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, सीएसआईआर-एनपीएल, सीएसआईआर-आईएचबीटी और एम्स के प्रतिनिधि शामिल रहे। इनके साथ जुबिलेंट बायोसिस, पैनासिया बायोटेक, फोर्ब्स टेक काउंसिल और बिट्स हैदराबाद जैसे इंडस्ट्री और टेक्नोलॉजी संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। अकादमिक और रिसर्च संस्थानों में पर्ड्यू यूनिवर्सिटी, एमिटी यूनिवर्सिटी, आईआईएसईआर कोलकाता, आईआईटी गांधीनगर, आईआईटी हैदराबाद, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर, यूनिवर्सिटी ऑफ दिल्ली, प्लाक्षा यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ओटागो, न्यूज़ीलैंड सहित अन्य संस्थान शामिल रहे।
डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 के समापन पर बोलते हुए, डॉ. पद्मा वेंकट, डीन एसओएचएसटी, यूपीईएस ने कहा, हम भारत के हेल्थकेयर और रिसर्च इकोसिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें क्षमताओं का निर्माण, शोधकर्ताओं और इनोवेटर्स की अगली पीढ़ी को तैयार करना, और इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग के अवसर बनाना शामिल है। डब्ल्यूसीएचएसटी जैसे प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से हम एक ऐसे फ्यूचर-रेडी टैलेंट और रिसर्च इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान देना चाहते हैं, जो वैज्ञानिक ज्ञान और इनोवेशन को भारत और दुनिया के लिए सार्थक समाधानों में बदल सके।
डॉ. सुनील राय, वाइस चांसलर, यूपीईएस ने कहा “हेल्थकेयर का भविष्य मेडिकल साइंस,उभरती टेक्नोलॉजीज़ और इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च को जोड़कर वास्तविक दुनिया की चुनौतियों का समाधान करने में है। यूनिवर्सिटीज़ की महत्वपूर्ण भूमिका है कि वे वैज्ञानिक खोजों को व्यावहारिक उपयोग से जोड़ें और भविष्य के लिए तैयार प्रोफेशनल्स को विकसित करें। डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 इसी विज़न को मजबूत करता है, क्योंकि यह सहयोग को बढ़ावा देता है और रिसर्च-ड्रिवन इनोवेशन्स को प्रोत्साहित करता है, जो हेल्थकेयर को अधिक सुलभ, प्रभावी और सस्टेनेबल बना सकते हैं।”
दूसरे दिन प्रो. भूषण पटवर्धन, नेशनल रिसर्च प्रोफेसर – आयुष चेयरमैन, एग्जीक्यूटिव कमेटी, नैक और डिस्टिंग्विश प्रोफेसर, सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी, ने “इंडियन नॉलेज सिस्टम्स एज अ सोर्स ऑफ बायोमेडिकल इनोवेशन” विषय पर कीनोट एड्रेस दिया। इसके साथ प्रो. पीण् गिरिधर, डायरेक्टर, सीएसआईआर-सीएफटीआरआईए मैसूरु, ने “फूड प्रोसेसिंग एंड फूड फोर्टिफिकेशन” विषय पर संबोधन दिया, जिसमें पारंपरिक ज्ञान, बायोमेडिकल इनोवेशन और न्यूट्रिशनल सिक्योरिटी की भूमिका को रेखांकित किया गया। प्रो. सुरेश मित्तल, डिस्टिंग्विश प्रोफेसर ऑफ वायरोलॉजी, पर्ड्यू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ वेटरिनरी मेडिसिन, ने भी “वैक्सीन्स इन द मॉडर्न एरा- ट्रायम्फ्स, टर्बुलेंस एंड मिथ्स” विषय पर कीनोट दिया।
“ब्रेकिंग बॉटलनेक्स- चैलेंजेज एंड अपॉर्च्युनिटीज फ्रॉम ड्रग डिस्कवरी टू कमर्शियलाइजेशन” विषय पर एक पैनल डिस्कशन हुआ, जिसकी अध्यक्षता प्रो. एण्केण् नांगिया, डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट, यूपीईएस ने की। इस पैनल में प्रो. सुरेश मित्तल, प्रो. बिमलेंदु रॉय, डायरेक्टर ऑफ स्केल-अप एंड प्रोसेस आरएंडडी, जुबिलेंट बायोसिस लिमिटेड, और डॉ. मुकेश एडजंक्ट प्रोफेसर, यूपीईएस शामिल हुए। चर्चा में वैज्ञानिक खोजों को हेल्थकेयर समाधानों में बदलने के पहलुओं पर विचार किया गया। दिन का समापन सिनेप्स – स्टूडेंट्स फोरम के साथ हुआ, जिसकी थीम “फॉर द स्टूडेंट्स, बाय द स्टूडेंट्स” थी। इसमें अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट छात्रों ने रिसर्च और हेल्थकेयर इनोवेशन्स प्रदर्शित किए। इसी थीम वाले इस फोरम ने दस उत्कृष्ट छात्र इनोवेशन्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स को भी सम्मानित किया, जिससे हेल्थकेयर में उभरते विचारों और समाधानों को सामने लाया गया।
तीसरे दिन समानांतर कीनोट्स हुए। पद्म भूषण प्रो. एनण्केण् गांगुली, पूर्व डायरेक्टर जनरल, आईसीएमआर ने “माइक्रोबायोम साइंस, हेल्थ एंड इमर्जिंग एआई-ड्रिवन अप्रोचेज़” विषय पर संबोधन दिया। वहीं डॉ. पी.जी. दिवाकर, पूर्व डिस्टिंग्विश साइंटिस्ट, इसरो और डायरेक्टर सेंटर फॉर सस्टेनेबिलिटी, चाणक्य यूनिवर्सिटी ने “स्पेस टेक्नोलॉजी-बेस्ड एप्लिकेशन्स फॉर हेल्थ-जीआईएस” विषय पर कीनोट दिया। डॉ. पी.जीण दिवाकर ने “द फ्यूचर ऑफ ह्यूमन हेल्थ बिटवीन प्रोग्रेस एंड एथिक्स” विषय पर एक पैनल डिस्कशन की अध्यक्षता भी की। इसमें डॉ. अजय टुकरू, लीड फॉर हेल्थ पॉलिसी इनोवेशन्स, मॉनिटरिंग, प्लानिंग एंड फोकल पॉइंट फॉर डिजिटल हेल्थ, यूनिसेफ इंडिया, डॉ. प्रदीप कुमार सिंह प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन और प्रो. प्रशांत एन. सुरवज्हाला, सिस्टम्स जीनोमिक्स लैब, मणिपाल यूनिवर्सिटी जयपुर शामिल हुए। चर्चा में साइंस, टेक्नोलॉजी और हेल्थकेयर के संगम पर हो रही प्रगति को समझा गया।
कांग्रेस का समापन वैलेडिक्टरी और अवॉर्ड सेरेमनी के साथ हुआ, जिसमें रिसर्च, इनोवेशन और साइंटिफिक कम्युनिकेशन में उत्कृष्टता को यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड, बेस्ट ओरल प्रेजेंटेशन, बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन, इनोवेशन शोकेस अवॉर्ड, इंडस्ट्री एक्सीलेंस अवॉर्ड और प्रोडक्ट इनोवेशन अवॉर्ड के माध्यम से सम्मानित किया गया।
डब्ल्यूसीएचएसटी 2026 ने नॉलेज एक्सचेंज, उभरती प्रतिभाओं को सम्मानित करने और ऐसे कनेक्शन्स को मजबूत करने के लिए एक मंच प्रदान किया, जो वैज्ञानिक प्रगति को भारत और दुनिया के लिए प्रभावशाली हेल्थकेयर समाधानों में बदलने में मदद कर सकते हैं।
यूपीईएस के बारे में,
उत्तराखंड राज्य विधानमंडल के यूपीईएस अधिनियम, 2003 के तहत स्थापित, यूपीईएस एक टॉप-रैंक्ड, यूजीसी-मान्यता प्राप्त निजी यूनिवर्सिटी है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के नेशनल इंस्टिट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क यानी एनआईआरएफ 2025 के अनुसार, यूपीईएस को यूनिवर्सिटीज़ में 45वां स्थान मिला है। इसके साथ ही लॉ में 18वां, मैनेजमेंट में 36वां और इंजीनियरिंग में 43वां स्थान मिला है। टाइम्स हायर एजुकेशन यानी टीएचई वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 के अनुसार, यूपीईएस अब वैश्विक स्तर पर 501.600 बैंड में और भारत में 5वें स्थान पर हैए जो 2025 में 7वें स्थान से बेहतर है। विशेष रूप सेए रिसर्च क्वालिटी में यूपीईएस ने केवल एक वर्ष में 57 स्थानों की छलांग लगाई और वैश्विक स्तर पर 299वां स्थान हासिल किया। इसके अलावा, यूनिवर्सिटी को क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2026 द्वारा भारत में अकादमिक रेप्युटेशन के आधार पर नंबर 1 निजी यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है। यह दुनिया की टॉप 2ः यूनिवर्सिटीज़ में शामिल है।
यूपीईएस को विश्व स्तर पर प्रशंसित क्यूएस रेटिंग द्वारा एम्प्लॉयबिलिटी यानी प्लेसमेंट्स में 5 स्टार मिले हैं। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की सूची के अनुसार, यूपीईएस के 50़ फैकल्टी मेंबर्स दुनिया के टॉप 2ः रिसर्चर्स में शामिल हैं।
यूपीईएस अपने सात स्कूलों के माध्यम से ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम्स प्रदान करता है, स्कूल ऑफ एडवांस्ड इंजीनियरिंग, स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस, स्कूल ऑफ डिजाइन, स्कूल ऑफ लॉए स्कूल ऑफ बिजनेस, स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज़ एंड टेक्नोलॉजी और स्कूल ऑफ लिबरल स्टडीज़ एंड ह्यूमैनिटीज़। यूपीईएस परिवार में 20,000़ छात्रए 1,500़ फैकल्टी और स्टाफ मेंबर्स और 40,000़ एलुमनाई की एक मजबूत कम्युनिटी शामिल है, जो अलग.अलग सेक्टर्स में ईवाई, केपीएमजी, बेन एंड कंपनी, मैकिन्से एंड कंपनी, कैपजेमिनी, गूगलएl, माइक्रोसॉफ्ट, ऑरेकल, नेस्ले, आईटीसी, अदाणी पावर, ओएनजीसी, जीएमआर, टीसीएस, विप्रो, इन्फोसिस, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, एक्सेंचर, डेलॉइट और अन्य प्रमुख ब्रांड्स में काम करते हैं।

