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Home»उत्तराखंड»स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य सचिव ने सुशासन, विकसित उत्तराखण्ड और हिमालय संरक्षण का लिया संकल्प
उत्तराखंड देहरादून राज्य समाचार August 15, 2026

स्वतंत्रता दिवस पर मुख्य सचिव ने सुशासन, विकसित उत्तराखण्ड और हिमालय संरक्षण का लिया संकल्प

Devbhumi NewsBy Devbhumi NewsAugust 15, 2026No Comments7 Mins Read
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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य सचिव, उत्तराखण्ड श्री आनन्द बर्द्धन ने प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, उत्तराखण्ड पुलिस एवं पीएसी के जवानों, राजकीय इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों एवं शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि उन असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का दिन है, जिनके संघर्ष से आज भारत एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक और संप्रभु राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन राष्ट्र निर्माण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है।
उन्होंने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी एवं सामरिक क्षेत्रों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत के वैज्ञानिक अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल कर रहे हैं, युवा विश्वभर में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं और डिजिटल तकनीक ने शासन एवं नागरिक सेवाओं के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन किया है। अब हमारा लक्ष्य ऐसा समावेशी, सतत और गुणवत्तापूर्ण विकास सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक नागरिक को समान अवसर मिले और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

*25 वर्ष के उत्तराखण्ड में उपलब्धियों के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी*

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की 25 वर्षों की यात्रा आत्मावलोकन और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। राज्य का गठन केवल प्रशासनिक पुनर्गठन नहीं था, बल्कि इसके पीछे पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं, भौगोलिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियों और विकास की आकांक्षाओं का लंबा संघर्ष रहा है। उन्होंने कहा कि इन 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल, पर्यटन, डिजिटल कनेक्टिविटी और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। इसके बावजूद पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन, रोजगार के पर्याप्त अवसरों का सृजन, दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य एवं शिक्षा की पहुंच, आपदा जोखिम को कम करना, जल स्रोतों का संरक्षण और हिमालयी पारिस्थितिकी की रक्षा जैसी चुनौतियों पर निरंतर कार्य करने की आवश्यकता है।

*विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य*

मुख्य सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री के वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प की सफलता में उत्तराखण्ड की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। हमारा लक्ष्य ‘विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखण्ड’ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का अर्थ केवल बड़े शहरों और बड़ी परियोजनाओं से नहीं है। विकसित उत्तराखण्ड वह होगा, जहां पहाड़ का युवा अपने गांव में रहकर सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सके, महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हों, प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रत्येक नागरिक को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। गांव सड़क, इंटरनेट और आधुनिक सुविधाओं से जुड़े हों तथा विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बनें।

*सुशासन और परिणाम आधारित प्रशासन सर्वोच्च प्राथमिकता*

मुख्य सचिव ने कहा कि सचिवालय राज्य शासन का मस्तिष्क है और यहां लिए गए प्रत्येक निर्णय का प्रभाव प्रदेश के गांव-गांव और प्रत्येक नागरिक तक पहुंचता है। इसलिए प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि सरकार का प्रत्येक निर्णय नागरिक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि प्रशासन को केवल योजनाओं और फाइलों तक सीमित न रखते हुए ‘फाइल डिस्पोजल’ से आगे ‘आउटकम डिलीवरी’ की ओर ले जाना होगा। प्रशासन की सफलता इस बात से तय होगी कि सरकारी निर्णयों और योजनाओं से लोगों के जीवन में कितना वास्तविक सुधार आया। उन्होंने ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की भावना के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस, डाटा एनालिटिक्स और अन्य आधुनिक तकनीकों के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से प्रशासन को अधिक तेज, पारदर्शी, संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाया जाना चाहिए।

मुख्य सचिव ने सचिवालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से कहा कि वे स्वयं को केवल सरकारी कर्मचारी नहीं, बल्कि लोक सेवक मानें। उन्होंने कहा कि उनके पास जो अधिकार हैं, वे व्यक्तिगत अधिकार नहीं बल्कि जनता द्वारा सौंपी गई जिम्मेदारियां हैं। कार्यालय में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक केस या फाइल के रूप में नहीं, बल्कि उसकी आशाओं, अपेक्षाओं और परिवार से जुड़े व्यक्ति के रूप में देखा जाना चाहिए।

*स्थानीय अर्थव्यवस्था और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए*

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड की वास्तविक शक्ति हमारे गांवों, महिलाओं, युवाओं और प्राकृतिक संपदा में है। पर्वतीय अर्थव्यवस्था के ऐसे मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है, जो स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित हों और स्थानीय उत्पादन को वैश्विक बाजार से जोड़ें। उन्होंने मिलेट्स, स्थानीय कृषि उत्पाद, बागवानी, औषधीय एवं सुगंधित पौधों, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद तथा पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला स्वयं सहायता समूहों ने इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है और अब इन्हें केवल आजीविका समूहों तक सीमित न रखते हुए ग्रामीण उद्यमिता के केंद्र के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

*युवाओं के लिए रोजगार के साथ उद्यमिता के अवसर*

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड का युवा केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बने—यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। स्टार्टअप, नवाचार, पर्यटन, आईटी, नवीकरणीय ऊर्जा, क्रिएटिव इकोनॉमी और उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर विकसित करने होंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होना चाहिए कि उत्तराखण्ड का युवा रोजगार के लिए केवल देहरादून, दिल्ली, चंडीगढ़ या बेंगलुरु की ओर न देखे, बल्कि रोजगार और उद्यम के अवसर पहाड़ तक पहुंचें और प्रतिभा पहाड़ से बाहर जाने के बजाय यहीं अवसर प्राप्त करे।

*हिमालय और पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास*

मुख्य सचिव ने कहा कि उत्तराखण्ड हिमालय का प्रहरी है। राज्य की नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और अर्थव्यवस्था का आधार हैं। इसी प्रकार जंगल जल स्रोतों, जैव विविधता और जलवायु संतुलन के महत्वपूर्ण संरक्षक हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड का विकास हिमालय-संवेदनशील विकास मॉडल पर आधारित होना चाहिए। आपदा प्रबंधन में प्रतिक्रियात्मक दृष्टिकोण के बजाय पूर्व तैयारी और जोखिम न्यूनीकरण पर जोर दिया जाना चाहिए। अर्ली वार्निंग सिस्टम, रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट, आपदा-रोधी निर्माण और जलवायु अनुकूलन को विकास की मुख्यधारा में शामिल करना आवश्यक है।

*जिम्मेदार और उच्च मूल्य वाले पर्यटन पर जोर*

मुख्य सचिव ने कहा कि पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। अब पर्यटन को केवल अधिक संख्या में पर्यटकों तक सीमित न रखकर रिस्पॉन्सिबल, सस्टेनेबल और हाई-वैल्यू टूरिज्म की दिशा में आगे बढ़ाना होगा। उन्होंने स्पिरिचुअल टूरिज्म, वेलनेस एवं योग, एडवेंचर, इको-टूरिज्म, होमस्टे, विंटर टूरिज्म और सांस्कृतिक पर्यटन की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि चारधाम यात्रा हमारी आध्यात्मिक विरासत है, लेकिन इसके साथ उत्तराखण्ड के छोटे गांवों, लोक संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प और प्राकृतिक सौंदर्य को भी पर्यटन की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता है।

*कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता और संवेदनशीलता का लिया संकल्प*

मुख्य सचिव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें स्वतंत्रता, जिम्मेदारी और संकल्प—इन तीन मूल भावनाओं की याद दिलाता है। हमें स्वतंत्रता को समृद्धि, समान अवसर और सम्मानजनक जीवन में परिवर्तित करना है।
उन्होंने सचिवालय के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों का आह्वान किया कि वे कर्तव्यनिष्ठा, पारदर्शिता, नवाचार और संवेदनशीलता को अपनी कार्यसंस्कृति का आधार बनाएं तथा संकल्प लें कि उनका प्रत्येक निर्णय उत्तराखण्ड के हित में, प्रत्येक प्रयास जनहित में और प्रत्येक कार्य विकसित उत्तराखण्ड की दिशा में होगा।

अंत में मुख्य सचिव ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, शहीद भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद सहित सभी महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए समर्पित भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बलों, पुलिस बलों तथा सभी वीर जवानों के प्रति भी सम्मान व्यक्त किया और सभी से मिलकर नए एवं विकसित उत्तराखण्ड के निर्माण का आह्वान किया।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव, सचिवगण, अपर सचिवगण, सचिवालय परिवार के अधिकारी कर्मचारी एवं स्कूल के बच्चे भी उपस्थित थे।
*सूचना एवं लोक सम्पर्क विभाग*

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